पत्थर में पारस की,
पंछी में सारस की
और तिथियों में ग्यारस की बात ही कुछ न्यारी है
दुनिया में एशिया की,
एशिया में भारत की
और भारत में गुजरात की बात ही कुछ न्यारी है

स्वर्णिम गुजरात वर्ष के सुनहरे अवसर पर
प्रदेश - देश - विदेश के समस्त गुजराती भाई-बहिनों को
हास्य कवि अलबेला खत्री की अनुपम भेन्ट
